कैसे पता लगाते हैं जीवाश्म की उम्र ? C -14 Dating क्या है ?

C – 14 Dating को Radiocarbon dating भी कहा जाता है इसकी खोज American physicist Willard F. Libby ने 1946 में की थी इस खोज के लिए उन्हें 1960 का Nobel Prize भी दिया गया था |


जीवाश्म (Fossils ) क्या होते हैं ( What are Fossils ?)

बच्चो आपने अक्सर सुना होगा कि किसी स्थान की खुदाई में कई सौ वर्ष पुराना कोई जीवाश्म या Fossil मिला है , जैसे किसी जानवर का कंकाल या कोई अन्य अवशेष | बिलकुल Jurassik Park Movie की तरह इन अवशेषों को जीवाश्म (Fossil ) कहा जाता है |

अब आप जानना चाहेंगे कि किसी Fossil को देखकर यह कैसे बता दिया जाता है कि यह कितने साल पुराना है जबकी वो तो लाखों वर्षों से धरती में दबा हुआ है | आज हम आपको इसी बारे में विस्तार से बताएंगे |

सबसे पहले बात करते है जीवाश्म या Fossils की –

जीवाश्म (Fossils ) –

बहुत प्राचीन जीवित जीवों के संरक्षित अवशेष (Preserved Remains ) जो कभी पृथ्वी पर रहते थे या चट्टानों और पत्थरों में छपे हुए कोई निशान  , जो पृथ्वी की सतहों या चट्टानों की परतों में सुरक्षित रह जाते हैं , उन्हें जीवाश्म के नाम से जाना जाता है । यह शब्द जीव और अश्म से मिलकर बना होता है जिसका अर्थ होता है पत्थर |

जीवाश्म (Fossil ) कार्बनिक विकास (Organic Growth )  को सही साबित करते हैं |

इन जीवाश्मो के अध्ययन का प्रथ्वी के विकास को जानने में महत्वपूर्ण योगदान है |

जीवाश्मो के अध्ययन को जीवाश्म विज्ञान या Paleontology कहा जाता है।

 विभिन्न प्रकार के जीवाश्मों (Fossils )  की जांच करने  से पता चलता है कि किस प्रकार धरती पर  अलग अलग समय में भिन्न भिन्न प्रकार के जानवर रहते थे |

कुछ बहुत पुराने  Fossils में केवल सबसे सरल जीवों के अवशेष होते हैं, पर उसके बाद के नए  अवशेषों  में कई  अधिक जटिल जीवों के अवशेष पाए गए हैं |

इन Fossils का अध्ययन करने से ऐसा प्रतीत होता है कि , सरल संरचना वाले जीव सरल जीवों से विकसित हुए हैं। अधिकांश Fossils  के बारे में कोई लिखित प्रमाण  नहीं हैं, लेकिन घोड़े, ऊंट, हाथी, मनुष्य आदि केFossils की लगभग पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा चूका है , जो Organic  Growth का जीता जागता प्रमाण है |

जीवाश्म को अंग्रेजी में Fossil कहा जाता है। Fossil  शब्द लैटिन शब्द “Fossilus”  से बना  हुआ है, जिसका अर्थ है “खुदाई करने वाला।” सामान्य: जीवाश्म( Fossils )  शब्द प्राचीन  Geological Ages  के जैव अवशेषों (Bio-Remains  )को  है जो पृथ्वी की पपड़ी के तलछटी चट्टानों में पाए जाते हैं। इन जीवाश्मों (Fossils ) से यह जानकारी मिलती  है कि वे जैविक मूल (Biological Origin )  के हैं और अपने आप में जैविक सबूत (Biological Evidence ) हैं।

जीवाश्म  (Fossils ) का निर्माण कैसे होता है – (How Fossils are Formed ?)

अब जब हम जानते हैं कि  Fossils क्या होते है  तो मन मे यह जिज्ञासा आती है कि जीवाश्म आखिर बनते कैसे है और इतने वर्षों में भी नष्ट क्यूँ नहीं होते है ?

हम जानते हैं कि मरने के बाद किसी भी जीव का शरीर नष्ट होने लगता है  | लेकिन Fossils किसी भी  मृत जीव के वो अवशेष है जो सड़ने से बच जाते है  या सड़कर भी नष्ट नहीं होते |  जीवाश्म (Fossils  ) के निर्माण या उनके संरक्षण की विधि पशु या पौधे की प्रकृति, उसकी जीवन शैली और उसकी मृत्यु और सड़ने की स्थिति और समय  पर निर्भर होती  है।

जीवाश्म (Fossils )  के निर्माण के  लिए दो चीजें आवश्यक हैं

जीव के शरीर में कठोर भागों जैसे नाखून , हड्डियाँ आदि  की मौजूदगी

बिना किसी देरी के मरने के बाद  तलछट (Sediment ) के साथ सुरक्षित किया गया |

जैसे कि मिस्र में म्रत्यु के बाद शरीर को सुरक्षित रखने की परम्परा थी |

मजबूत कवच वाले जीवों के  जीवाश्म पाए जाते है  क्यूंकि वो आसानी से विघटित नहीं हो पाते |  इसी प्रकार, अगर किसी जीव की म्रत्यु दलदल में होती है  तो , उसके खुले मैदान में मरने वाले जीव की तुलना में जीवाश्म (Fossils )  होने की संभावना कहीं अधिक पाई जाती है |  इसका कारण यह है कि खुले मैदान में बैक्टीरिया द्वारा मृत जीव के शरीर को नष्ट किया जा सकता है |

चूंकि जीवाश्म  (Fossils  ) तलछट (Sediment )  के अंदर बनते हैं, ज्यादातर जीवाश्म उथले पानी के नीचे बनते हैं, जहां Sediment  लंबे समय तक जल्दी और लगातार जमा होती रहती है | यहाँ   तलछट(Sediment ) की अधिक परतें ऊपर का बनती जाती हैं, कंकाल के आसपास तलछट कॉम्पैक्ट और रॉक की ओर मुड़ना शुरू कर देती है।

चट्टान से पानी रिसने से हड्डियाँ टूटने  लगती हैं। पानी में खनिज (Minerals ) हड्डी की जगह ले  लेते हैं, जिससे मूल हड्डी की एक चट्टान प्रतिकृति बन जाती है जिसे जीवाश्म  (Fossils )कहते हैं।

बर्फीले क्षेत्रों में जीवों के अवशेष बर्फ की मोटी परत के नीचे दब कर संरक्षित हो जाते है | भारत में भी रूपकुंड के निकट मानवो के पूर्ण अवशेष बर्फ में दबे हुए पाए गए हैं |

साइबेरिया में भी एक हाथी के बच्चे के अवशेष बर्फ में दबे पाए गए थे | बर्फ में दबने से बैक्टीरिया शरीर को नष्ट नहीं कर पाते जिससे Fossils बन जाते हैं |

अब जानते हैं कि जीवाश्मों (Fossils ) की आयु का निर्धारण कैसे किया जाता है |

जीवाश्म विज्ञानियों (Paleontologists ) के लिए, जीवाश्म की आयु निर्धारित करने के  C-14 Dating पद्धति का उपयोग किया जाता है |

C-14 Dating क्या है ( What is C -14 Dating ? )

जैसा कि हम जानते हैं की मानव और सभी जीव जंतु अपने भोजन और आवास और सांस लेने के लिए किसी न किसी प्रकार से पेड़ – पौधों पर निर्भर रहते हैं | हमारे वातावरण में Oxygen , Nitrogen , Carbon आदि सभी तत्व मौजूद रहते है जब तक प्राणी जीवित होते हैं तो इन सभी तत्वों का एक चक्र चलता रहता है जिसकी वजह से वातावरण में एक संतुलन बना रहता है | इसमें से कार्बन एक ऐसा तत्व है जिसकी मदद से जीव वैज्ञानिक Fossils की आयु का पता लगा सकते है | किसी भी प्राणी में कार्बन के दो रूप मौजूद होते है c 12 और C 14 |

c-14 एक Radioactive Isotope है |

इनमे से C -12 की मात्र अस्थिर होती है , पर C-14 की मात्रा मृत्यु के तुरंत बाद से लगातार घटती जाती है | c-14 , Atmospheric Nitrogen के साथ Cosmic Rays के संपर्क द्वारा वायुमंडल में लगातार निर्मित हो रहा है। यह C- 14 वातावरण में मौजूद Oxygen के साथ क्रिया कर Radioactive Carbon Dioxide बनाती है | यह Radioactive Carbon Dioxide पौधों में Photosynthesis की प्रक्रिया के दौरान उनका एक हिस्सा बन जाता है | और जब जानवर और अन्य जंतु इन पेड़ –पौधों को खाते हैं तो यह C-14 जंतुओं में पहुँच जाता है | जब जानवर या पौधे की मृत्यु हो जाती है, तो वह अपने पर्यावरण के साथ कार्बन का आदान-प्रदान बंद कर देता है, और उसके बाद C -14 की मात्रा घटना शुरू हो जाती है |

इसका कारण है C -14 का Radioactive Decay जिसमे Unstable Atomic Nucleus अपनी ऊर्जा को छोड़ता है और Radiation को  निष्काषित करता है , और प्राणी की म्रत्यु के बाद कार्बन का आदान प्रदान भी समाप्त हो चुका होता है यहीं से c-14  Dating की प्रक्रिया की शुरुआत होती है |  C- 14 की Half Life 5730 वर्ष होती है इसी के आधार पर किसी जीव या Fossil की आयु का निर्धारण किया जाता है | क्यूंकि C-14 एक निश्चित दर वसे लगातार नष्ट होता है | इस विधि की सहायता से 500 से 50,000 साल पुराने Fossils का अध्ययन किया जा सकता है |

C-14 Dating की खोज किसने की थी ( Who Invented C-14 Dating )

C – 14 Dating को Radiocarbon dating भी कहा जाता है इसकी खोज American physicist Willard F. Libby ने  1946 में की थी इस खोज के लिए उन्हें 1960 का Nobel Prize भी दिया गया था |

क्या यह सभी Fossils की आयु निर्धारण में उपयोगी है –

C- 14 Dating की सहायता से 60,000 से अधिक पुराने Fossils की आयु का पता नहीं लगाया जा सकता |


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