देखने का अनोखा विज्ञान ? ( How do we see ?)

बच्चो क्या आप जानते हो की आपके शरीर का कौन सा हिस्सा आपको किताब पढने में मदद करता है ? इन्द्रधनुष के रंग पहचान लेता है ? जब आप दुखी होते हैं तो आंसू भर आते हैं और जब खुश होते हैं तो ख़ुशी से छलक आते हैं | किस हिस्से में ऐसी मांसपेशियां हैं जो आपको उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समायोजित करती हैं जो करीब या दूर हैं? जी हाँ आप बिलकुल सही हैं हम यहाँ आँखों के बारे में ही बात कर रहे हैं | आँखे हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है | आज हम आपको बताएँगे कि हम कैसे देखते है ? आँखे किसी कैमरे की तरह ही कार्य करती हैं , जिस प्रकार कैमरे में छवि उतारी जाती है कुछ उसी प्रकार की कार्यविधि हमारी आँखों की भी होती है | आँखे लगातर काम करती हैं यहाँ तक की जिस पल आप सोने के लिए आँखे बंद करते हैं, उस पल भी आंखें काम पर होती हैं। वे आपके आस-पास की दुनिया के बारे में कई जानकारी एकत्र करती हैं जैसे आकार, रंग, चाल, और बहुत कुछ। फिर वे आपके मस्तिष्क को प्रसंस्करण के लिए जानकारी भेजते हैं ताकि मस्तिष्क जान सके कि आपके शरीर के बाहर क्या चल रहा है। देखा हैं न आंख का कमाल। आईये देखते है की आँख की सहायता से हम कैसे देख सकते हैं ? हम कैसे देखते हैं, यह जानने के लिए हमे पहले आँख की संरचना को समझना होगा – आप अपनी खुद की आंख को आईने में देख कर या किसी दोस्त की आंख को देखकर (लेकिन छूकर नहीं) आंख के विभिन्न हिस्सों की जांच कर सकते हैं। आंख के कुछ हिस्सों को देखना आसान है, लेकिन आँख की अंदरूनी सरंचना को हम नहीं देख सकते |

आंख का आकार – (Size of an Eye )

आंख पिंग-पोंग बॉल जितनी बड़ी होती है और खोपड़ी में थोड़े खोखले क्षेत्र (आई सॉकेट) में रहती है । पलक आंख के सामने के हिस्से की सुरक्षा करती है। पलक एक मिनट में कई बार खुलने और बंद होने से आंख को साफ और नम रखने में मदद करती है। इसे पलक झपकना कहा जाता है, और यह एक स्वैच्छिक और अनैच्छिक क्रिया है, जिसका अर्थ है कि आप जब चाहें तब पलक झपका सकते है | पलक आँखों का सुरक्षा कवच होती हैं | जब हम तीव्र प्रकाश की और देखते है या हमे अपनी आँखों पर कोई खतरा महसूस होता है तो तुरंत ही पलके बंद हो जाती हैं और हमारी नाज़ुक आँखों को बाहरी खतरों से बचाती हैं |

श्वेत पटल और कनीनिका (Sclera):

नेत्रगोलक के सफेद भाग को श्वेतपटल कहा जाता है । यह नेत्रगोलक को कवर करने का महत्वपूर्ण काम करता है| यह आंख की दीवार के बाहर श्वेतपटल सख्त, सफेद, रेशेदार पदार्थ होता है। यह कॉर्निया से जुड़ा होता है। यह आंख के अंदर की नाजुक संरचनाओं की रक्षा करता है।आंख के सफ़ेद भाग पर छोटे गुलाबी धागे दिखते हैं। ये रक्त वाहिकाएं हैं, जो श्वेतपटल तक रक्त पहुंचाती हैं।

कॉर्निया

एक पारदर्शी गुंबद, आंख के रंगीन हिस्से के सामने रहता है। कॉर्निया आंख को केंद्रित करने में मदद करता है क्योंकि प्रकाश अपने में से जाने देता है। यह आंख का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन आप इसे शायद ही देख सकते हैं क्योंकि यह स्पष्ट ऊतक से बना है। एक साफ़ कांच की तरह, कॉर्निया आपकी आंख को दुनिया को देखने में मदद करता है |

आइरिस (Iris)

आइरिस आँख का रंगीन हिस्सा है , आइरिस से ही आँख के रंग का निर्धारण होता है | आईरिस में इससे जुड़ी मांसपेशियां होती हैं जो यह निर्धारित करती हैं की आँख में कितना प्रकाश प्रवेश करेगा |अगर प्रकाश अधिक होता है तो आइरिस की पुतली pupil ) का आकार सिकुड़ जाता है और अगर प्रकाश कम है तो आइरिस की पुतली का आकार फ़ैल जाता है |

द्रष्टि पटल ( Retina ) –

नेत्र गोलक के सबसे भीतरी भाग को दृष्टि पटल कहते हैं | सबसे भीतरी भाग पतला , कोमल व संवेदी होता है। बाहरी भाग दांतेदार होता है जिसे ओरा सिरेटा (Ora serrate.) कहते है। रेटिना प्रमुख दो स्तरों होते हैं – 1. संवेदी स्तर (Sensory level) 2. रंगा स्तर

(A) संवेदी स्तर :

संवेदी स्तर में तीन परत होती हैं – (i) श्लाका एवं शंकु परत (cone layer) इस परत में दो प्रकार की कोशिकाएँ होती है। अ. श्लाका : नेत्र में 115 मिलियन शलाका होती है , इनमे रोडोक्सिन वर्णक पाया जाता है। ये कोशिकाएँ आँख को प्रकाश व अंधकार में देखने के लिए सक्षम बनाती है। (ब ) शंकु (Cone ) : एक नेत्र में 6.5 मिलियन शंकु कोशिकाएं होती है , इसके अंदर आयोडोक्सिन नामक वर्णन पाया जाता है । यह रंग भेदने में मदद करती हैं । (ii) द्विध्रुवीय न्यूरोन स्तर (Bipolar neuron level): यहाँ द्विध्रुवीय तंत्रिका कोशिकाएँ सिनैप्स बनाती है। (iii) गुच्छ्कीय स्तर (Cluster level ) : यहाँ एक्सोन दृक तंत्रिकाओ के तन्तुओ में रूपांतरित हो जाते है। इस के आधार भाग को अंग बिंदु कहते है।

लेंस (lens)

आइरिस के पीछे पारदर्शी उभरा हुआ उत्तल व लचीला लैंस होता है , इस पर संयोजी ऊत्तक का लचीला लेन्स फिट होता है। लेंस व कोर्निया के मध्य अक्ष द्रश्य अक्ष (visual axis) कहलाती है। द्रश्य अक्ष के सम्मुख स्थित दृष्टि पटल का मध्य भाग पीला दिखाई देता है इसे पीत बिंदु या मैकुला लुटिया(macula lutea. ) कहते है। लैंस सिलियरी काय के अन्दर लचीले निलम्बन रुनायु द्वारा गोलक की गुहा में होता है। लैंस व कोर्निया के बीच के भाग पारदर्शी द्रव भरा होता है इसको तेजो जल कहते है। यहाँ लेंस व रेटिना के बीच पारदर्शक लसेदार गाढ़ा द्रव भरा होता है जिसे काचाभ द्रव (sessile fluid.) कहते है।

आँखों की सहायता से हम कैसे देख पाते है ? –

किसी वस्तु से निकलने वाली प्रकाश किरणें जब नेत्र के अंदर प्रवेश करती है तो नेत्र में उपस्थित तेजो जल प्रकाश किरणों को अपवर्तित कर देता है , यह प्रकाश किरण आइरिस से गुजरती हुई लेंस में से होकर गुजरती है इस समय लेन्स इन्हें अपनी ओर फोकस दुरी के अनुसार झुका देता है और अब ये किरणें द्रष्टि पटल पर पड़कर वस्तु का उल्टा व वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाती है। है न आश्चर्य की बात की जो वस्तु का प्रतिबिम्ब आँख में उल्टा बन रहा है , फिर हम कैसे वस्तु को सीधा देख पाते हैं ? द्रष्टि पटल पर बने उलटे प्रतिबिम्ब को संवेदी कोशिकाएँ उत्तेजित होकर द्रष्टि तंत्रिका तंत्र द्वारा मस्तिष्क में पहुंचाती है | अब मस्तिष्क का कार्य शुरू होता है , आपका मस्तिष्क इस जानकारी को संसाधित करता है, यह फिर से छवियों को सीधा करता है इसलिए हम दुनिया को उल्टा नहीं देखते हैं। ये भी पढ़िए – http://blog.scienceshala.com/black-hole/79/

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