4 तरह का कोयला कैसे बना करोड़ साल पहले ज़मीन में जंगल दबने से |Million years ago, 4 types of coal made by submerging the forest in the ground

आजकल आप एक न्यूज़ लगातार सुन रहे होंगे की कोयले की कमी के चलते देश को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है | और इसका कारण यह है की देश में उत्पादित बिजली का 70 प्रतिशत भाग कोयले से बनता है | और अब यह कोयला ख़तम हो रहा है , क्यूंकि कोयला जीवाश्म ईंधन का एक रूप है , और यह प्रक्रति में सीमित मात्रा में ही उपलब्ध है और लगातार दोहन होने की वजह से कोयले के भण्डार समाप्त होते जा रहे है  | जिसकी वजह से हमें ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है |

इस संकट का सबसे बड़ा कारण है की धरती के अन्दर कोयले को बनने में  करोडो साल लगते है | यह प्रक्रिया काफी लम्बी होती है | चलिए इसको थोडा विस्तार में समझते हैं |

पृथ्वी के नीचे कोयला बनने में कई करोडो साल लगते है , जब ज्वालामुखी बाढ़ या किसी और प्राक्रतिक आपदा की वजह से धरती पर मौजूद पेड़ पौधे मिटटी में दब जाते है | और यही पेड़ पौधे  30 करोड साल की प्रक्रिया के बाद कोयले में बदल जाते है | यहाँ ऑक्सीजन की कमी और कारबन की मौजूदगी में यह धीरे धीरे परिवर्तित होने लगता है | पेड़ पौधे के अवशेषों से कोयला बनने की प्रोसेस चार चरणों में पूरी होती है |

पीट कोयला | Peat Coal –

जमीन के अंदर गर्मी काफी ज्यादा होती है , जिसकी वजह से  सबसे पहले पीट कोयले का निर्माण होता है , इसमें कार्बन कम होता है और इसके अलवा भी कई और पदार्थ मिले हुए होते है | समय के साथ दबाब और ऑक्सीजन की कमी के चलते यह पदार्थ ही कोयले में बादल जाता है | इस प्रक्रिया की कार्बनीकरण कहते हैं |

लिग्नाईट कोयला| Lignite Coal –

इस चरण में जो कोयला बनता है उसे लिग्नाईट कहते हैं ,काफी समय तक, पृथ्वी के अंदर होने वाली प्रतिक्रियाओं जैसे पृथ्वी के अंदर प्लेटों द्वारा दबाव, उच्च तापमान, निर्जलीकरण, कार्बोनाइजेशन प्रक्रि या के कारण पीट कोयला भूरे रंग के कोयले में बदल जाता है।इस कोयले में 25 से 30 प्रतिशत तक कार्बन होता है , यह नमी युक्त होता है | इसमें ऊर्जा की कमी होती है , ज्यादातर पॉवर प्लांट में इसी कोयले का उपयोग बिजली बनाने के लिए किया जाता है |

सब बिटुमिनस कोयला | Sub Bitumen Coal-

इसके बाद कई और सालो तक दबे रहने के बाद यह भूरे काले  रंग के कोयले में बादल जाता है , जिसे सब बिटुमिनस कोयला कहा जाता है | इस कोयले में 35 से 45 प्रतिशत तक कार्बन होता है | इस कोयले का उपयोग भी बिजली बनाने के लिए किया जाता है |

बिटुमिनस कोयला | Bitumen Coal –

लगातार कई करोड़ साल तक ज़मीन में दबे रहने से कोयले में नमी की मात्रा कम हो जाती है , और  कार्बन की मात्रा बढ़ जाती है | यह बहुत ही उच्च गुणवत्ता वाला कोयला होता है | इसमें 45 से 80 प्रतिशत तक कार्बन पाया जाता है | इसका उपयोग लोहा , स्टील और सीमेंट के निर्माण में किया जाता है | इसके साथ ही बिजली निर्माण में भी यह उपयोगी होता है |

एन्थ्रेसाईट| Anthracite Coal

सबसे उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को एन्थ्रेसाईट कहा जाता है | इसका रंग गहरा काला होता है | इस तरह के कोयले में  80 से 98 प्रतिशत तक कार्बन पाया जाता है | इस तरह के कोयले का उपयोग स्पेस हीटिंग के लिए किया जाता है |  इसको जलाने पर कम धुँआ और ज्यादा ऊर्जा प्राप्त होती है |

दुनिया में उत्पादित कुल कोयले के 68 प्रतिशत का उपयोग बिजली बनने में किया जाता है | इसके अलावा 7 प्रतिशत का उपयोग स्टील 7 प्रतिशत और स्पेस हीटिंग में 3 प्रतिशत में होता है | दुनिया में सबसे अधिक कोयले का उत्पादन अमेरिका में होता है | इस लिस्ट में भारत तीसरे  स्थान पर है |

यहाँ एक सवाल अभी भी बाकि रह जाता है की , क्या ज़मीन में दबने वाले सभी पेड़ पौधे कोयले में बदल जाते हैं |  तो ऐसा नहीं है , क्यूंकि कोयले के निर्माण के लिए उच्च दाब और गर्मी की ज़रूरत होती है , और जिन जगहों पर ऐसा नहीं होता वहां पेड़ पौधों के अवशेष कोयले में न बादल कर दुसरे खनिज में बादल जाते है |

अभी भी एक सवाल बाकी है की कोयले को उसका जलने वाला गुण कहाँ से मिलता है |

पेड़-पौधे अपना भोजन बनाने के लिए को कार्बन डाई ऑक्साइड, पानी और सूर्य का प्रकाश का उपयोग  करते है तथा ऑक्सीजन छोड़ते है जो मनुष्य के जीवित रहने के लिए बहुत जरुरी है।लेकिन जब पेड़-पौधे जलते है तो इसका उल्टा होता है। पेड़-पौधे जलने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है तथा जलने पर ऑक्सीजन गैस छोड़ते है।पेड़-पौधे सूर्य से जो प्रकाश  का उपयोग करते है वह प्रकाश कार्बन में बदल जाता है। और आपको पता होगा कि ऊर्जा को नष्ट नहीं किया जा सकता सिर्फ एक रुप से दूसरे रुप में बदला जा सकता है। जब करोड़ो साल बाद कोयला बनता है तो वही सूर्य का प्रकाश कार्बन के रुप में बदल जाता है जिसे जलने पर वह उष्मा उत्पन्न करता है।

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