सबसे बड़ा बल बुद्धिबल

( Hindi stories with moral values for class 4 )

एक जंगल में  भासूरक  नामक शेर रहता था। वह प्रतिदिन भोजन के लिए पशुओं को मारा करता था। एक दिन जंगल में सभी जानवरों ने मिलकर शेर से निवेदन किया कि , उसे रोज एक पशु भोजन के लिए मिल जाया करेगा , इसलिए वह अनेक पशुओं का शिकार ना करा करे।  शेर यह बात मान गया। उस दिन के बाद शेर को घर बैठे एक पशु मिलने लगा। शेर ने यह धमकी दे दी थी कि , जिस दिन उसे कोई पशु नहीं मिलेगा उस दिन वह फिर अपने शिकार पर निकल जाएगा और मनमाने पशुओं की हत्या कर देगा। इस डर से भी सब पशु बारी-बारी एक – एक पशु को शेर के पास भेजते रहते थे।

इसी क्रम में एक दिन खरगोश की बारी आ गई। खरगोश शेर की मांद की ओर चल पड़ा। मौत की घड़ियों को कुछ देर और टालने के लिए वह जंगल में इधर – उधर भटकता रहा। एक स्थान पर उसे एक कुआं दिखाई दिया। कुएं में झांक कर देखा तो उसे अपनी परछाई दिखाई दी। उसे देखकर उसके मन में एक उपाय सूझा। यह उपाय सोचता – सोचता बहादुर अब शेर के पास पहुंचा। शेर उस समय तक भूखा प्यासा होट चाटता बैठा था। खरगोश को देखकर शेर ने क्रोध से लाल – लाल आंखें करते हुए गरजकर कहा !

नीच खरगोश एक तो तू इतना छोटा सा है और फिर इतनी देर लगा कर आया ?

खरगोश ने यहाँ बदल दी खेल पढ़ें आगे

खरगोश ने विनय से सिर झुकाकर उत्तर दिया स्वामी ! आप व्यर्थ क्रोध करते हैं कुछ भी फैसला करने से पहले देरी का कारण तो सुन लीजिए , फिर क्या बात है ? जल्दी बता खरगोश स्वामी बात यह है कि सभी पशुओं ने आज यह सोच कर , कि मैं बहुत छोटा हूं , मेरे साथ चार अन्य खरगोश को आपके भोजन के लिए भेजा था। हम पांचों आपके पास आ रहे थे कि , मार्ग में एक दूसरा शेर अपनी गुफा से निकल कर आया और बोला अरे ! किधर जा रहे हो तुम सब। मैंने उससे कहा हम सब राजा भासूरक शेर का भोजन है।

तब वह बोला भासूरक कौन होता है ?

यह जंगल तो मेरा है। मैं ही तुम्हारा राजा हूं , तुम मे से चार खरगोश यहीं रह जाए।

एक खरगोश भसुरक  के पास जाकर उसे बुला लाए। मैं उससे स्वयं निपट लूंगा।

इसलिए मुझे देर हो गई यह सुनकर भसुरक  क्रोध में बोला ऐसा है तो जल्दी से मुझे उस दूसरे शेर के पास ले चलो , अब तो मैं उसका रक्त पीकर ही अपनी भूख मिटा लूंगा। मेरे जंगल में कोई दूसरा राजा नहीं हो सकता। अब तो खरगोश मन ही मन खुश होकर शेर को कुएं के पास ले गया और बोला स्वामी ! आपको दूर से ही देख कर वह अपने दुर्ग में घुस गया है।भासूरक छोडूंगा नहीं मैं उसे , दुर्ग में ही घुस कर मारूंगा।

खरगोश शेर को कुएं की मेढ़ पर ले गया भासूरक ने झुककर कुएं में अपनी परछाई देखी तो समझा कि , यह शेर दूसरा है। तब वह जोर से गरजा  उसके गरजने  से कुएं में दुगनी गूंजे पैदा  हुई। उस गूंज को दुश्मन शेर की ललकार समझकर भासूरक उसी क्षण कुएं में कूद पड़ा , और वहीं पानी में डूबकर प्राण दे दिए।

खरगोश ने अपनी बुद्धि से शेर को हरा दिया।  वहां से लौटकर वह पशुओं की सभा में गया। उसकी चतुराई सुन कर और शेर की मौत का समाचार सुनकर सब जानवर खुशी से नाच उठे।

शिक्षा   – बली वही है जिसके पास बुद्धि का बल है।

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