कहानी Electron के खोज की

 Electron  क्या है? ( What is an Electron )

Electron  एक कम द्रव्यमान वाला, ऋणात्मक  (Negative ) रूप से आवेशित कण है।

Electron  पहला मौलिक कण था जिसे खोजा गया था। Electron की खोज का श्रेय J.J. Thomson  ने  सन 1896 अपने Discharge Tube  में किए गए प्रयोगों के आधार पर किया । उन्होंने सुझाव दिया कि Electron  सभी परमाणुओं के आवश्यक घटक हैं। J.J. Thomson   ने एक Discharge Tube   में 0.01 मिमी एचजी के कम दबाव पर गैस के ऊपर कई  प्रयोग किए।

Electron Subatomic Particle कहा जाता  परमाणु (Atom )  को किसी भी चीज़ का सबसे छोटा भाग माना जाता  है पर Atom  के भी कई छोटे हिस्से होते है जिन्हें Subatomic Particle कहते हैं , इन्ही में से एक Electron होता है यह electron , Atom के नाभिक के चारों और चक्कर लगाते रहते हैं |

इलेक्ट्रॉनों की विशेषताएँ (Characteristics Of Electron )

पदार्थ की संरचना में सबसे छोटी इकाई Atom  है। परमाणु केंद्र में एक Nucleus से बना होता है और Nucleus के चारों ओर एक या अधिक Electron   परिक्रमा करते है। Nucleus में Proton  और Neutron  होते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से Nucleus  कहा जाता है। Proton, Positively Charged Particles होते हैं जिनका  Mass 1.00728 amu होता है , औरNeutron  1.00867 amu  के द्रव्यमान के साथ Electrically Neutral Particles  होते हैं।

Electron  0.000549 amu  के द्रव्यमान के साथ Negatively Charged  कण  होते हैं। Proton  और Neutron , Electron  की तुलना में लगभग 1836 गुना भारी हैं। Electron की संख्या Proton की संख्या के बराबर होती है जिसके परिणामस्वरूप एक तत्व का एक तटस्थ परमाणु होता है। Electronic Arrangements  एक तत्व के Chemical Properties  को निर्धारित करती है जबकि Nuclear Structure  परमाणु के स्थायित्व और Radioactive Transformation को निर्धारित करती है |

Electron की खोज कैसे हुई – ( How Electron was invented )

Electron की खोज J .J Thomson ने उस समय की थी जब वह Cathode Ray Tube पर प्रयोग कर रहे थे |

Cathode Ray Discharge Tube  यह नाम प्रयोग से लिया गया था क्योंकि इसमें एक Glass Tube  होता है जिसमें दो Electrode होते हैं  Anode  और Cathode  और इस Glass Tube   में एक Vaccum Pump  होता है जो ट्यूब में Pressure को नियंत्रित करता है। अब दोनों Electrode को High Voltage  दिया जाता है। जाता है | पहले कैथोड रे डिस्चार्ज ट्यूब को वैक्यूम पंप से पूरी तरह से खाली कर दिया गया था

+Ive Plate , Anode  में छोटे छेद किए गए थे

Anode  के पीछे, Zns  की एक स्क्रीन लगाई गई थी  

इस ट्यूब में दोनों Electrode  पर High Voltage(10,000 volts )  लगाया जाता है, ऐसा करने पर Anode  के पीछे Zns ( जिंक सल्फाइड)  की स्क्रीन  पर कुछ चमक दिखाई देती है |

इससे यह साबित होता है कि  कुछ आवेश या कण Cathode से निकल कर Anode से होते हुए ZnS की परत तक पहुंचे  |

अब इस Particle  का Nature क्या है यह जानने के लिए हम Cathode Ray Tube पर Electric Field को Apply करेंगे अब हम देखेंगे कि यह Particle

+ वाली plate तरफ Attract हुआ और जैसा की हम जानते है की हमेशा विपरीत प्रक्रति के Charge में आकर्षण होता है  ( Charges attract towards opposite charge )  तो इससे सिद्ध होता है कि उन Particle पर Negative Charge है | इन Particles को Electron नाम दिया गया | जो Beam , Cathode से  ZnS की और जा रही थी उस Cathode Ray नाम दिया गया |

Sir J.J. Thomson द्वारा  किए गए प्रयोग की कुछ ख़ास बातें –

Source Tutorvista.com

1) उन्होंने एक Discharge Tube ली जो एक लंबी Glass Tube  थी , जिसे दोनों सिरों पर सील किया गया और दो Metal Electrode  के साथ लगाया गया था |

2) इसमें Stop Cock के साथ एक साइड ट्यूब फिट किया गया था  जिसमे अंदर गैस के दबाव को कम करने के लिए एक Vaccum Pump  से जोड़ा जा सकता था |

जब लगभग 10000 वोल्ट के High Voltage  को Electrode  के बीच लगाया जाता है, तो निम्नलिखित परिणाम विभिन्न Pressure में देखे जाते हैं:

1) जब  गैस का Pressure ,  one atmosphere होता है, तो इलेक्ट्रोड के बीच कोई Current  Flow  नहीं होता है।

2) जब दबाव लगभग 10 मिलीमीटर तक कम हो जाता है, तो Electrode के बीच धारा प्रवाहित होने लगती है और रंगीन चमक दिखाई देती  है,  चमक का रंग ली गई Gas पर निर्भर करता है |

3) जब दबाव लगभग 0.01 मिलीमीटर से  कम हो जाता है, तो Electrode  के बीच की चमक गायब हो जाती है लेकिन Current  Flow  जारी रहता है और यदि एक perforated anode  का उपयोग किया जाता है, तो anode  के पीछे कांच की दीवारों पर एक हरी  चमक देखी जाती है। इससे पता चलता है कि कुछ Invisible Rays ,  Cathode  से Emit  होती हैं जो Anode के छिद्रों से होकर गुजरती हैं और दीवार टकराती  हैं। इन Rays  को Cathode Rays  कहा जाता है।

Cathode Rays  के गुण – Characteristics of Cathode rays

1) वे अपने रास्ते में रखी Solid Thing  की एक Clear Shadow बनाती   हैं। इससे पता चलता है कि Cathode Rays  सीधी रेखा में गति  करती हैं।

2) यदि एक धुरी पर लगाए गए हल्के  paddle wheel   को उनके रास्ते में रखा जाता है, तो पहिया घूमने लगता है। इससे पता चलता है कि Cathode Rays   भौतिक कणों से बनी होती हैं।

3) जब किसी Electric Field  को Cathode Rays  पर लगाया जाता है, तो उन्हें Electric Field  की Positive Plate  की ओर जाती हुई प्रतीत होती है। इससे पता चलता है कि Cathode Rays पर  Negative Charge  होता हैं।

4) जब Cathode Rays  धातु की सतह से टकराती हैं, तो गर्म हो जाती है। यह सिद्ध  करता है कि Cathode Rays  , Heating Effect  भी उत्पन्न करती है |

5) वे Discharge Tube  की कांच की दीवारों के साथ-साथ कुछ अन्य fluorescence पदार्थों जैसे ZnS  पर हरी चमक  का उत्पादन करते हैं।

6) उनके पास penetrating effect  होता है अर्थात वे धातुओं के पतली परत  से आसानी से गुजर सकते हैं।

Cathode Rays  को बनाने वाले Negativily Charge  से आवेशित भौतिक कणों को Electron  कहा जाता है।

इलेक्ट्रॉनों के आवेश / द्रव्यमान के अनुपात के निर्धारण के लिए (determination of the ratio of charge/mass of electrons)

इस प्रयोग को J.J. Thomson 1897 में किया था । उन्होंने विभिन्न धातुओं के Electrode के साथ लगे अलग-अलग डिस्चार्ज ट्यूब का इस्तेमाल किया। उन्होंने ट्यूब में अलग-अलग गैसों को रखा। उन्होंने हर बार पाया कि

इलेक्ट्रॉन के आवेश / द्रव्यमान का अनुपात समान था।

मान 1.76 × 108 coulombs/ g   पाया गया

इलेक्ट्रॉन पर आवेश के निर्धारण के लिए (For the determination of the charge on the electron )

R.A. Millikan  ने  1917 में  Electron पर आवेश का निर्धारण  Oil Drop experiment  से किया

इसका  मान 9.11 × 10-10 ग्राम पाया गया

एक इलेक्ट्रॉन वह मूलभूत कण है जो 1 इकाई ऋणात्मक आवेश को वहन करता है और उस हाइड्रोजन परमाणु के 1/1837 वें भाग के बराबर द्रव्यमान रखता है।

Electron Configuration –

Electron Configuration  हमें बताता है कि Energy Level  या  nucleus  के चारों ओर Electron  को कैसे व्यवस्थित किया जाता है। एकAtom  में Electron  सबसे कम उपलब्ध Energy Level  पर कब्जा कर लेते हैं जो innermost available shells  हैं।

पहले Level  या Shell  में केवल अधिकतम 2 Electron  हो सकते हैं।

इसके बाद Energy Level  अधिकतम 8 Electron को रख  सकते हैं।

Electron Configuration  को संख्याओं की एक श्रृंखला के रूप में लिखा जाता है, उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन 2, 6 और एल्यूमीनियम 2, 8, 3 है।

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